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प्रशांति निलयम में आज लिखित
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Sunday , Feb 12, 2012 |
जीवन भ्रम रूपी वृक्ष के सामान है जिसमे शाखाये, पत्ते, और फूल माया के बने हैं। आपको यह अहसास तब होगा जब आपने सभी कर्म भगवान को समर्पित कर देंगे। आप उन्हें हर आकर प्रकार में महसूस करें जिसकी छोटी से छोटी कोशिका में वे बसे हैं; जैसे सूरज जिसकी गर्मी से सारे अणु बनते हैं। सभी में उन्हें देखो; सबमे उनकी पूजा करो; वही सब कुछ हैं। सभी कार्यो को भक्ति भाव से करो। ये भक्ति ही पवित्रता देगा। कागज एक रद्दी का टुकड़ा होता लेकिन यदि इस पर प्रमाण-पत्र लिख दिया जाये तो यह अमूल्य खजाना बन जाता है; यह भविष्य में पदोन्नति के लिए एक पासपोर्ट बन जाता है। इसलिए भाव महत्वपूर्ण है बाह्य नहीं। जब तक आप कार्य को पूजा में बदने का रहस्य नहीं समझेंगे तब तक आप निराशा और दु: ख से ग्रस्त रहेंगे। पूजा के पवित्र स्थानों में, कम मूल्य का पत्थर भी देवताओ का रूप धर लेते हैं। लेकिन जब इस मूर्ति के प्रति भक्ति की भावना आती है, यह मानव मन के लिए उच्चतम स्तर प्रदान करता है। ~ बाबा |
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